म्युचुअल फंड निवेश से होने वाले लाभ पर इनकम टैक्स की गणना कैसे की जाती है?
इंडियन इनकम टैक्स एक्ट में म्यूचुअल फंड के लिए विशेष प्रावधान है। यह कानून के अनुसार ऐसे म्यूचुअल फंड स्कीम्स जो अपने एसेट का 65 फीसदी या उससे ज्यादा हिस्सा भारत में लिस्टेड कंपनियों की इक्विटी यानी शेयरों में निवेश करती हैं, इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड (Equity Oriented Mutual Fund) कहलाती हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने पर इक्विटी यानी शेयर में निवेश की तरह ही टैक्स लगता है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से ज्यादा का निवेश लॉन्ग टर्म माना जाता है। ऐसे में 12 महीने से ज्यादा निवेश करके पैसे निकालने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। यदि किसी ने इक्विटी फंड को एक साल की अवधि के भीतर ही रिडीम कर लिया तो उस पर लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट का फायदा नहीं मिलेगा। लेकिन, तब भी इस पर 15 फीसदी के हिसाब से ही शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में जो भी कैपिटल गेन होता है, उसे निकालते हैं तो कुछ रकम आप टैक्स फ्री निकाल सकते हैं। आयकर कानून में प्रावधान है कि आपको एक साल के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। इससे ऊपर जो भी मुनाफा होगा, उस पर 10 फीसदी टैक्स लगेगा।
आइए एक ऐसे परिदृश्य पर विचार करें जहां एक असेसी 28 मार्च 2024 को इक्विटी म्यूचुअल फंड रिडीम करता है। चूंकी 29 मार्च को गुड फ्राइडे की वजह से बैंक और बाजार बंद थे और उसके बाद शनिवार और रविवार। इसलिए बेचने वाले को पैसा नए वित्त वर्ष में मिला। अब सवाल उठता है कि उसका कैपिटल गेन वित्तीय वर्ष 2023-24 में गिना जाएगा या वित्तीय वर्ष 2024-25 में? इस व्यक्ति पर टैक्स कब लगेगा?
भारत का आयकर कानून कहता है कि ऐसे मामलों में, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कैपिटल गेन उस अवधि में कर योग्य है जब ट्रांजेक्शन किया जाता है। भले ही उसका पेमेंट वास्तव में कब प्राप्त हुआ है। ऊपर दिए गए उदाहरण के आधार पर, वित्तीय वर्ष 2023-24 में ही कैपिटल गेन कर (Taxable) योग्य होगा। चाहे उन्हें पेमेंट साल 2024-25 में क्यों नहीं मिली हो।
म्यूचुअल फंड लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन का अच्छा टूल माना जाता है. इसमें किए निवेश पर मिलने वाला रिटर्न यानी मुनाफा टैक्स के दायरे में आता है. आयकर कानून के तहत इसे कमाई माना जाता है, जिस पर कैपिटल गेन टैक्स देना होता है. टैक्स का कैलकुलेशन फंड किस तरह का है और उसमें आपका होल्डिंग पीरियड कितना है इस पर निर्भर करेगा. म्यूचुअल फंड की पहली और सबसे अहम कैटेगरी इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड की है.
डेट म्यूचुअल फंड में आपका निवेश 31 मार्च 2023 या उससे पहले का है तो आपको इंडेक्सेशन का फायदा मिलता रहेगा. इस कंडीशन में डेट फंड की यूनिट को 36 महीने से ज्यादा रखकर बेचने पर इंडेक्सेशन बेनेफिट के बाद मुनाफे पर 20 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. इंडेक्सेशन टैक्स देनदारी घटाने में मदद करता है. 36 महीने से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन लागू होगा और टैक्स स्लैब के हिसाब से मुनाफे पर टैक्स बनेगा.
सभी ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीम्स, जिनका भारतीय कंपनियों की इक्विटी में निवेश 35 फीसदी से ज्यादा, लेकिन 65 फीसदी से कम है वो तीसरी कैटेगरी में आती हैं. इनमें कुछ हाइब्रिड फंड आते हैं. इन स्कीम में अगर आप 36 महीने से ज्यादा निवेश करते हैं तो यह लॉन्ग टर्म माना जाएगा और इंडेक्सेशन बेनेफिट के बाद मुनाफे पर 20 फीसदी टैक्स लगेगा. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होने पर इसे रेगुलर कमाई की तरह माना जाएगा और स्लैब रेट के मुताबिक टैक्स लगेगा।
नोट: म्युचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है मैं आपको किसी भी तरह निवेश करने की सलाह नहीं दे रहा निवेश करने से पहले अपने सलाहकार से विचार-विमर्श करें।

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