विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की कला
निर्णय लेने और समस्याओं को सुलझाने का कौशल
जब मैं किसी समस्या का सामना करता हूं तो उसी समय मैं अपने दिमाग को यह सोचने पर मजबूर कर देता हूं कि इस समस्या का कारण क्या है और यह कहां से आ रही है और जब मुझे इसका कारण पता चल जाता है तो मैं इसे बहुत आसानी से हल कर लेता हूं।
चलिए! एक उदाहरण से समझते हैं
कई बार आपको अपने पिता के गुस्से का सामना करना पड़ा होगा और आपने माफ़ी भी मांगी होगी क्योंकि आप कारण जानते थे कि आपने गलती की है इसलिए आपके पिता आप पर अपना गुस्सा दिखाते हैं, उसी तरह जब आपको कारण पता चल जाता है तो आप अपनी समस्याओं को बहुत आसानी से हल कर लेते हैं और वह भी बिना किसी मदद के।
निर्णय लेने का कौशल
आत्मनिरीक्षण के माध्यम से निर्णय लेने का कौशल हासिल किया जा सकता है। जब भी हमें कोई निर्णय लेने की आवश्यकता होती है तो हमें यह प्रश्न पूछना पड़ता है कि क्यों? फिर सवाल पूछें कब? कितना महत्वपूर्ण? इस तरह के प्रश्न हमें अपने लक्ष्यों और उद्देश्यों में गहराई से उतरने की अनुमति देंगे ताकि हम अपनी आंतरिक जटिलता को समझ सकें। एक बार जब हम स्वयं को इस प्रश्न पूछने का अभ्यास करने के लिए अभ्यस्त कर लेंगे तो हमारे जीवन में काफी स्पष्टता आ जाएगी।
सही निर्णय लेने के लिए आपको अपनी योग्यता पहचाननी होगी। जिसके लिए आप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं, यह जाँचें। अर्थात आपकी ताकत (स्ट्रेन्थ) और कमजोरी (विकनेस) के बारे में मनन करें। अन्यथा अगर आपने अपनी मर्यादाओं को नहीं पहचाना तो लक्ष्य प्राप्त करते समय आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
सही निर्णय हम तभी दे सकते हैं जब हमारा दिमाग बिल्कुल शांत और संतुलित हो प्रायः ऐसा देखा गया है कि जब हम क्रोध में या अन्य भाव में होते हैं तो हम उस परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेते हैं जो की ज्यादातर गलत ही साबित होता है।
जब समस्या समाधान कौशल की बात आती है तो समाधान खोजने के लिए हमें समस्या को तार्किक तरीके से देखना होगा। इसलिए हमें गणित की समस्याओं को हल करने का अभ्यास करना होगा, गणित हमें फोकस खोए बिना हर समस्या को तार्किक रूप से, क्रमबद्ध तरीके से हल करने के लिए मजबूर करता है। इसलिए, जितना अधिक हम गणित का अभ्यास करेंगे उतना ही बेहतर हम अपनी वास्तविक जीवन की समस्याओं को तार्किक तरीके से हल करने में सक्षम होंगे।
ये स्किल्स आपको खुद ही डेवलप करनी होंगी, क्योंकि इस दुनिया को देखने का नजरिया हर किसी के पास होता है, फिर भी मैं आपको अपने बारे में एक बात बताना चाहता हूं, मैं हमेशा अपना फैसला लेता हूं, मैं अपनी जिंदगी के फैसले कभी किसी को नहीं लेने देता, क्योंकि मैं मुझे अपनी जिंदगी जीनी है तो मैं अपनी जिंदगी के फैसले दूसरे हाथों में क्यों दूं।
जब आपने कोई निर्णय लिया है तो उसके परिणाम के साथ परिस्थितियों में परिवर्तन भी आएगा। ऐसे में अगर आपके निर्णय लेने से बदलाव आ रहा है तो बदलाव जरूर करें। क्योंकि अपनी सहज स्थिति अर्थात कंफर्ट जोन से बाहर आना जरूरी है। नहीं तो आप अपनी क्षमताओं को समझ नहीं पाएंगे।

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