अब नहीं चलेगी क्रेडिट ब्यूरो (सिबिल) की मनमानी
गुरुवार को मोनेटरी पॉलिसी कमेटी या एमपीसी (MPC) की बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बात पर जोर दिया कि समय पर क्रेडिट सूचना का खुलासा उधारकर्ताओं के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा, 'पाक्षिक रिपोर्टिंग आवृत्ति यह सुनिश्चित करेगी कि CIC द्वारा प्रदान की गई क्रेडिट सूचना रिपोर्ट में अधिक हाल की जानकारी दिखाई दे। यह उधारकर्ताओं और ऋणदाताओं (CI) दोनों के लिए फायदेमंद होगा। उधारकर्ताओं को जानकारी के तेजी से अपडेट होने का लाभ मिलेगा, खासकर तब जबकि उन्होंने ऋण चुका दिया हो। ऋणदाता उधारकर्ताओं का बेहतर जोखिम मूल्यांकन करने में सक्षम होंगे और उधारकर्ताओं द्वारा अधिक ऋण लेने के जोखिम को भी कम करेंगे।
क्रेडिट स्कोर को लेकर रिजर्व बैंक के पास लगातार बहुत सारी शिकायतें आ रही थीं. इसके चलते कुछ महीने पहले ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से सिबिल स्कोर (CIBIL Score) को लेकर एक बड़ा अपडेट जारी किया गया था और नियमों को सख्त बनाया. नए नियम अप्रैल 2024 से ही लागू हो चुके हैं. इसके तहत रिजर्व बैंक ने कुल 5 नियम बनाए थे और लागू किया, आइए जानते हैं इनके बारे में....
1- ग्राहक को भेजनी होगी सिबिल चेक करने की सूचना:-
केंद्रीय बैंक ने सभी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों से कहा है कि जब भी कोई बैंक या एनबीएफसी किसी ग्राहक की क्रेडिट रिपोर्ट चेक करता है तो उस ग्राहक को इसकी जानकारी भेजा जाना जरूरी है. यह जानकारी एसएमएस या ईमेल के जरिए भेजी जा सकती है. दरअसल, क्रेडिट स्कोर को लेकर कई शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक ने ये फैसला किया है.
2- रिक्वेस्ट को रिजेक्ट करने की वजह बताना जरूरी:
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार अगर किसी ग्राहक की किसी रिक्वेस्ट को रिजेक्ट किया जाता है तो उसे इसकी वजह बताया जाना जरूरी है. इससे ग्राहक को यह समझने में आसानी होगी कि किस वजह से उसकी रिक्वेस्ट को रिजेक्ट किया गया है. रिक्वेस्ट रिजेक्ट किए जाने की वजहों की एक लिस्ट बनाकर उसे सभी क्रेडिट इन्स्टीट्यूशन को भेजना जरूरी है
3- साल में एक बार ग्राहकों को दें फ्री फुल क्रेडिट रिपोर्ट:
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार क्रेडिट कंपनियों को साल में एक बार फ्री फुल क्रेडिट स्कोर अपने ग्राहकों को मुहैया कराया जाना चाहिए. इसके लिए क्रेडिट कंपनी को अपनी वेबसाइट पर एक लिंक डिस्प्ले करना होगा, ताकि ग्राहक आसानी से अपनी फ्री फुल क्रेडिट रिपोर्ट चेक कर सकें. इससे साल में एक बार ग्राहकों को अपना सिबिल स्कोर और पूरी क्रेडिट हिस्ट्री पता चल जाएगी।
4- डिफॉल्ट को रिपोर्ट करने से पहले ग्राहक को बताना जरूरी:
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार अगर कोई ग्राहक डिफॉल्ट होने वाला है तो डिफॉल्ट को रिपोर्ट करने से पहले ग्राहक को बताना जरूरी है. लोन देने वाली संस्थाएं SMS/ई-मेल भेजकर सभी जानकारी शेयर करें. इसके अलावा बैंक, लोन बांटने वाली संस्थाएं नोडल अफसर रखें. नोडल अफसर क्रेडिट स्कोर से जुड़ी दिक्कतें सुलझाने का काम करेंगे।
5- 30 दिन में करना होगा शिकायतों का समाधान
अगर क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी 30 दिन के अंदर-अंदर ग्राहकों की शिकायत का निपटारा नहीं करती है तो फिर उसे हर रोज 100 रुपये के हिसाब से जुर्माना चुकाना होगा. यानी जितनी देर से शिकायत का निपटारा किया जाएगा, उतना ही अधिक जुर्माना चुकाना होगा. लोन बांटने वाली संस्था को 21 और क्रेडिट ब्यूरो को 9 दिन का वक्त मिलेगा. 21 दिन में बैंक ने क्रेडिट ब्यूरो को नहीं बताया तो बैंक हर्जाना देगा. वहीं बैंक की सूचना के 9 दिन बाद भी शिकायत का निपटारा नहीं किया गया तो क्रेडिट ब्यूरो को हर्जाना चुकाना होगा।

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