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निवेश: हमसे कुछ कहता है

हर निवेश कुछ कहता है 
सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि निवेश के योग्य कंपनी कौन सी होती है? हो सकता है कि मेरे लिए जो निवेश योग्य कंपनी हो आप के लिए वो निवेश योग्य ना हो और जो आपके लिए निवेश योग्य कंपनी हो वह मेरे लिए निवेश योग्य ना हो। उदाहरण के तौर पर मैं ऐसी कंपनियों को चुनना पसंद कर सकता हूं जिसमें कॉरपोरेट गवर्नेंस के पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा हो। लेकिन कोई दूसरा निवेशक हो सकता है जो कॉरपोरेट गवर्नेंस ध्यान ना दे वह कह सकता है कि सब कंपनियों में कुछ ना कुछ गड़बड़ होती ही है जब तक कंपनी के नतीजे और बाकी आंकड़े अच्छे दिख रहे हैं मैं उनमें निवेश करने के लिए तैयार हूं।
 इस बात का मतलब यह है कि शेयरों को चुनने के लिए कोई एक तय चेक लिस्ट नहीं होती है। हर निवेशक को अपने हिसाब से अपने पसंदीदा शर्तें बनानी होती हैं जिनके आधार पर वह निवेश करेगा। हर निवेशक अपने अनुभव के आधार पर यह शर्तें तय करता है। लेकिन यह ध्यान देना चाहिए कि यह शर्तें किसी तर्क पर आधारित हों। वैसे इस अध्याय के अंत में मैं अपनी चेक लिस्ट आपको दिखाऊंगा। अगर आप निवेश करना अभी शुरू कर रहे हैं तो आप मेरी इस चेकलिस्ट इसका इस्तेमाल कर सकते हैं और उसमें से अपनी पसंद की शर्तें चुन सकते हैं।

 सबसे पहला सवाल यह है कि हम वह स्टॉक कैसे चुनें जिनके बारे में हम कह सकें कि वो हमें पसंद आ रहे हैं और जिनको हम अपने चेक लिस्ट की शर्तों पर जांचना चाहते हैं। इसको करने के कुछ रास्ते हैं:

जनरल ऑब्जर्वेशन : यानी आर्थिक गतिविधियों पर नजर- सुनने में यह बहुत साधारण सी बात लगेगी लेकिन स्टाक चुनने के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण तरीका है। आपको सिर्फ यह करना है कि अपने आसपास हो रही आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखें और अपने आंख और कान खुले रखें। देखें कि लोग क्या खरीद रहे हैं, क्या बेच रहे हैं? किस तरह के उत्पाद की मांग ज्यादा है? आपके पड़ोस में लोग किन उत्पादों के बारे में बातचीत कर रहे हैं? अमेरिकी शेयर बाजार के बहुत जाने-माने निवेशक पीटर लिंच ने अपनी किताब “वन अप ऑन वॉल स्ट्रीट(One up on Wall Street)” में इस तरीके की चर्चा की है। व्यक्तिगत तौर पर मैंने भी इस तरीके का इस्तेमाल किया है। मैंने PVR सिनेमा का स्टॉक निवेश के लिए चुना (क्योंकि मुझे दिख रहा था कि मेरे आस-पास PVR के मल्टीप्लेक्स काफी तेजी से खुल रहे हैं) कमिंस इंडिया का स्टॉक (मुझे दिखा कि मेरे आस-पास की हर कंपनी बिल्डिंग में कमिंस का डीजल जनरेटर लगा हुआ है), इंफोएज लिमिटेड का स्टॉक (क्योंकि मुझे दिखा कि ये को भारत में सबसे लोकप्रिय जॉब वेबसाइट naukri.com को चलाती है)

स्टॉक स्क्रीनर : इसे आप एक ऐसी छननी के तौर पर मान सकते हैं जिससे आप बहुत सारे स्टॉक्स में से अच्छे स्टॉक्स निकाल सकते हैं। इसका मतलब है कि स्टॉक चुनने के लिए ऐसी प्रक्रिया बनाना जिसको आप खुद तय करेंगे। इसके जरिए आप अच्छी क्वालिटी के शेयर चुन सकते हैं। उदाहरण के तौर पर आप एक ऐसा स्क्रीनर बना सकते हैं जिसमें आपने शर्त रखी हो कि शेयर का ROE 25% और PAT मार्जिन 20% से कम ना हो। इस तरीके से आप बहुत सारे स्टॉक्स में से कुछ काम के स्टॉक चुन सकते हैं। वैसे काफी स्टॉक स्क्रीनर ऑनलाइन मौजूद हैं लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं गूगल फाइनेंस का स्टॉक स्क्रीनर और screener.in को पसंद करता हूं।

अर्थव्यवस्था के संकेत- अच्छे स्टॉक चुनने का एक बेहतरीन तरीका है कि आप अर्थव्यवस्था के हालात पर नजर बनाए रखें। इसे एक उदाहरण से समझते हैं- आप देखेंगे कि इन दिनों भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर काफी ज्यादा जोर दिया जा रहा है। नए नए पुल, सड़कें और ऐसी तमाम चीजें बनाई जा रही है।देश में काम कर रही सीमेंट कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा । इसलिए मैं ऐसी सीमेंट कंपनियों को और की ओर देखूंगा जो मेरी चेक लिस्ट की शर्तों को पूरा करती है और इस नए चलन का फायदा उठा सकती हैं।

सेक्टर के ट्रेंड (चलन)- इसमें आप उन सेक्टरों को पहचानने की कोशिश करते हैं जहां पर नए चलन दिखाई पड़ रहे हैं। फिर उन सेक्टर में काम कर रही कंपनियों को पहचानने की कोशिश करते हैं जिनको इस चलन का फायदा मिल सके। उदाहरण के तौर पर हम जानते हैं कि 3 तरह के पेय पदार्थ भारत में काफी ज्यादा बिकते हैं कॉफी, चाय और बोतल का पानी। लेकिन अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पिछले दिनों एक नया चलन शुरू हुआ है वह एनर्जी ड्रिंक का। यह बाजार काफी तेजी से बढ़ा है और इसमें काफी संभावनाएं नजर आ रही है। अब आप इस सेक्टर की उन कंपनियों को खोजने की कोशिश कर सकते हैं जो एनर्जी ड्रिंक के कारोबार में जुड़ी हुई हैं या इसमें घुसने की तैयारी में है।

खास स्थिति- शेयर आईडिया निकालने का यह एक थोड़ा मुश्किल तरीका है। इसके लिए आपको कंपनियों, कंपनियों से जुड़ी खबरों और कंपनी की ऐसी घटनाओं पर नजर रखनी पड़ती है, जिससे आगे चलकर कंपनी को फायदा हो सकता है। मुझे एक उदाहरण याद है। सन 2013 में देश के बड़े टूर ऑपरेटर्स में से एक कॉक्स एंड किंग्स ने एचडीएफसी के केके मिस्त्री को अपने एडवाइजरी बोर्ड में शामिल किया। केकी मिस्त्री की बिजनेस और इंडस्ट्री में काफी इज्जत है माना जाता है कि उनको बिजनेस की अच्छी समझ है। मेरे एक दोस्त ने कहा कि केकी मिस्त्री के आने से कॉक्स एंड किंग्स को फायदा होगा। इसलिए उसने कंपनी के बारे में और रिसर्च करना शुरू किया ताकि वह देख सके कि निवेश की दूसरी शर्तें पूरी होती है या नहीं। फिर उसने उस शेयर में निवेश किया और आज वह 200% के मुनाफे पर बैठा है।

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