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SIP और SWP का कोंबो जीवन करे शानदार

आपने फाइनेंस इंफ्लुएंसर और एक्सपर्ट्स से म्यूचुअल फंड में एसआईपी यानी Systematic Investment Plan के बारे में जरूर सुना होगा। इसमें निवेश करना लंबी अवधि के अच्छा माना जाता है, लेकिन किसी म्यूचुअल फंड से निकलने का सही तरीका क्या है इसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।


क्या होता है SWP?
SWP किसी भी म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने का एक टूल है। इसमें एक फिक्स अमाउंट को सेट कर दिया जाता है, जिसे आप हर महीने अपने म्यूचुअल फंड में एकत्रित हुई राशि में से निकालते हैं। उदाहरण के लिए आपके म्यूचुअल फंड में 10 लाख रुपये जमा हुए हैं। आपने 10,000 रुपये प्रति माह का एसडब्लूपी की है, तो आपको हर महीने 10,000 रुपये की राशि मिलती रहेगी और बाकी बचे पैसे बाजार के हिसाब से घटते बढ़ते रहेंगे।

आखिर रिटायरमेंट की उम्र में पैसा ही सबसे बड़ी ताकत होता है क्‍योंकि अगर आप आर्थिक रूप से मजबूत हैं, तो आपको किसी से अपनी जरूरतों के लिए मदद नहीं लेनी पड़ती. इसलिए हर किसी को सलाह दी जाती है कि वो नौकरी के दौरान ही रिटायरमेंट प्‍लानिंग भी शुरू कर दे ताकि बुढ़ापे पर उसके पास फंड की कमी न रहे. लेकिन मोटा फंड जमा करने के साथ आपको बुढ़ापे के लिए रेगुलर इनकम का भी इंतजाम करना चाहिए क्‍योंकि आपकी रोजमर्रा की जरूरतें इसी से पूरी होती हैं. बुढ़ापे की रेगुलर इनकम को लेकर अगर आप हैं परेशान तो टेंशन छोड़कर अपना लीजिए SIP+SWP की स्‍ट्रैटेजी. इसके जरिए आपके पास फंड भी जमा हो जाएगा और रेगुलर इनकम भी होती रहेगी. जानिए इसके फायदे।

SIP में हर महीने निर्धारित राशि म्‍यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं और इस पर रिटर्न के साथ लंबे समय में बड़ा अमाउंट इकट्ठा करते हैं. SWP में निर्धारित राशि आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट होती है. SWP की राशि म्यूचुअल फंड यूनिट्स बिकने से आपको मिलती है. फंड खत्‍म हुआ तो SWP बंद हो जाएगा. SWP के जरिए आपको मंथली, तिमाही और सालाना कब पैसा चाहिए ये आपको तय करना होता है.

क्‍या है SIP+SWP स्‍ट्रैटेजी
SIP+SWP स्‍ट्रैटेजी के तहत आप अपनी नौकरी के दौरान एसआईपी के जरिए म्‍यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं. हालांकि मार्केट लिंक्‍ड होने के कारण एसआईपी में थोड़ा जोखिम है, लेकिन फिर भी लॉन्‍ग टाइम में इसका औसतन रिटर्न 15 फीसदी माना जाता है, जो किसी भी अन्‍य स्‍कीम के मुकाबले काफी अच्‍छा है. SIP में निवेश से कंपाउंडिंग का बेनिफिट मिलता है. आप एसआईपी में 20 से 30 सालों तक के लिए निवेश करें. इससे आप काफी अच्‍छा फंड तैयार कर सकते हैं, विगत कई स्मॉल कैप फंड्स में 30 वर्षों में सिर्फ 3.5 हजार रुपए की एसआईपी के साथ एक करोड़ से अधिक का फंड जुटाया जा चुका है।
इसके बाद जब रिटायर हो जाएं तो आपको सिस्टमैटिक विद्ड्रॉल प्लान यानी SWP का विकल्‍प चुनना होगा. इसके जरिए आप रेगुलर इनकम का इंतजाम कर सकते हैं. SWP में रिटर्न अनुमान 8 फीसदी के आसपास माना जाता है. SWP में, आप अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विद्ड्रॉल अमाउंट और उसके लिए अवधि यानी 10 साल, 20 साल या ज्‍यादा का विकल्‍प चुन सकते हैं. लेकिन ये इनकम तब तक ही होगी, जब तक आपके पास फंड है. फंड खत्‍म हुआ तो SWP बंद हो जाएगा. अगर 20 साल तक सिस्टमैटिक विद्ड्रॉल करने के बाद आपका इन्‍वेस्‍टड अमाउंट अगर बचता है तो आप SWP प्‍लान को आगे के लिए एक्‍सटेंड कर सकते हैं या फिर उस रकम को निकालकर कहीं और इस्‍तेमाल कर सकते हैं.

कैसे करें SWP की शुरुआत
रेगुलर कैश फ्लो की जरूरत के लिए SWP की शुरुआत कभी भी की जा सकती है. अगर किसी स्कीम में निवेश कर रहे हैं तो आप उसमें SWP विकल्प को एक्टिवेट कर सकते हैं. अगर आप SIP नहीं कर पाए हैं तो रिटायरमेंट पर मिलने वाले फंड का भी इस्तेमाल इसके लिए कर सकते हैं. SWP एक्टिवेट करने के लिए आपको फोलियो नंबर, विद्ड्रॉल की फ्रीक्वेंसी, पहली निकासी की तारीख, पैसे प्राप्त करने वाले बैंक अकाउंट को बताते हुए एएमसी में इंस्ट्रक्शन स्लिप भरना होगा या फिर अपने म्युचुअल फंड सलाहकार से संपर्क करें।

SWP के फायदे
ज़रूरत के मुताबिक निवेशक राशि चुन सकते हैं.
बाज़ार में निवेश रहने से अच्छे रिटर्न की उम्मीद.
महंगाई को मात देने के लिए अच्छा विकल्प.
बाज़ार में उतार-चढ़ाव को झेल सकता है.
SWP में ये सावधानियां बरतना बहुत जरूरी 
SWP कभी भी इक्विटी म्यूचुअल फंड से ना चलाएं. बाज़ार गिरने पर आपके फंड पर असर पड़ता है. ऐसे में निर्धारित राशि के लिए ज्यादा यूनिट्स बेचने पड़ेंगे और इससे पोर्टफोलियो बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा. SWP के लिए डेट/लिक्विड/हाइब्रिड फंड्स को बेहतर विकल्प माना जाता है।

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