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कन्फ्यूजन: म्युचुअल फंड में निवेश की शुरुआत कैसे करें? सिप या लमसम

जब हम म्युचुअल फंड में निवेश की शुरुआत करते हैं तब हमारे सामने जो सबसे बड़ी समस्या होती है कि हम म्युचुअल फंड निवेश सिप के थ्रू या फिर एकमुश्त निवेश के जरिए शुरुआत करें म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के जरिए आप कई तरह के एसेट में निवेश कर सकते हैं। अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं तो आपको गोल्ड म्यूचुअल फंड (Gold Mutual Fund) की स्कीम में निवेश करना होगा। अगर आप बॉन्ड (Bond) में निवेश करना चाहते हैं तो आपको डेट स्कीम (debt scheme) में निवेश करना होगा। इसी तरह आप शेयरों या स्टॉक्स में निवेश करना चाहते हैं तो आपको इक्विटी फंड में निवेश करना होगा। इसके अलावा म्यूचुअल फंड की हाइब्रिड स्कीम शेयर और बॉन्ड में निवेश करती है। कई लोग इन बातों को तो समझते हैं लेकिन जब सिप (SIP) की बात आती हैं तो वे थोड़ा उलझन में पड़ जाते हैं। आइए उनके उलझन के बारे में जानने की कोशिश करते हैं।
सबसे पहले तो यह जान लेना जरूरी है कि सिप अपने आप में निवेश का कोई अलग माध्यम नहीं है। यह म्यूचुअल फंड में निवेश का ही एक जरिया है। सिप का मतलब है सिस्टमैटिक इनवेस्ट प्लान (Systematic Investment Plan)। इसे संक्षेप में सिप या SIP कहते हैं। इसके नाम से ही जाहिर है कि यह सुनियोजित और व्यवस्थित निवेश का एक जरिया है। अगर कोई निवेश सिप में निवेश कर रहा है तो इसका मतलब है कि वह म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम में हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा निवेश कर रहा है।
कोई निवेशक म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना चाहता है तो उसके पास दो विकल्प हैं। पहला विकल्प एकमुश्त निवेश (Lumpsum investment ) का है। इस विकल्प में आप म्यूचुअल फंड में एकमुश्त निवेश करते हैं। ज्यादातर स्कीमों में एकमुश्त निवेश के लिए न्यूनतम राशि 5000 रुपये होती है। मान लीजिए आपके पास 50,000 रुपये हैं, जिसे आप कहीं निवेश करना चाहते हैं। अगर आप चाहें तो इस पैसे को म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम में लगा सकते हैं। इस निवेश को एकमुश्त निवेश कहा जाएगा।
एकमुश्त से अलग आप चाहें तो सिप (SIP) के माध्यम से भी म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम में निवेश कर सकते हैं। सिप बैंक के रेकरिंग डिपॉजिट (recurring deposit) स्कीम की तरह है। इसमें हर महीने एक निश्चित राशि आपके बैंक अकाउंट से म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम में चली जाती है। इसमें आप एकमुश्त निवेश नहीं करते बल्कि लंबी अवधि के दौरान एक निश्चित रकम हर महीने म्यूचुअल फंड की स्कीम में डालते हैं। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो म्यूचुअल फंड में निवेश तो करना चाहते हैं, लेकिन एक बार में 5000 रुपये का निवेश नहीं कर सकते।
सिप से निवेश के कई फायदे हैं। पहला तो यह निवेश के मामले में आपको अनुशासित (disciplined) रखता है। हर महीने आपका पैसा निवेश होता है। दूसरा, चूंकि अलग-अलग समय में आप किसी स्कीम में निवेश करते हैं तो उसकी यूनिट को भी आप अलग-अलग कीमत पर खरीदते हैं। इससे आपको कॉस्ट एवरेज बेनिफिट (cost average benefit) मिलता है। इसका मतलब यह है कि जब म्यूचुअल फंड की यूनिट की एनएवी (NAV) कम होती है तो आपको ज्यादा यूनिट एलॉट होते हैं। अगर एनएवी (NAV) ज्यादा होती है तो आपको कम यूनिट एलॉट होती है। इस तरह लंबी अवधि में आपके लिए यूनिट की औसत कीमत कम आती है। 
प्रयास करें की म्युचुअल फंड में निवेश आप डायरेक्ट ना करके किसी म्युचुअल फंड सलाहकार की सहायता लें जो आपके निवेशित फंड को अच्छी ग्रोथ दिला सकता है। हालांकि म्युचुअल फंड निवेश करने पर धैर्य रखें क्योंकि जैसे-जैसे समय बीतता है हमें कंपाउंडिंग ग्रोथ का लाभ मिलता है लंबे समय में निवेशकों को औसतन 15 फीसदी का कंपाउंडिंग रिटर्न मिल जाता है। उदाहरण के लिए यदि आप ₹5000 सिप के माध्यम से निवेश करते हैं तो आप 10 वर्षों में 13 लाख 93 हजार रुपए का फंड वैल्यू बना सकते हैं वहीं 20 वर्षों में आप 5000 की एसआईपी के माध्यम से 75 लाख 80 हजार रुपए तक का फंड वैल्यू बना सकते हैं वही तीस वर्षों तक लगातार मासिक निवेश करने पर आप 3.5 करोड़ तक का फंड वैल्यू बना सकते हैं।
यदि आपके पास अधिक पैसे हैं तो आप लम सम में निवेश कीजिए और कम पैसे हैं तो रेगुलर सिप के माध्यम से निवेश करें।

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