म्युचुअल फंड सही है पर....
शेयर बाजार में नए लोगों के शुरुआती सवाल कुछ यूं होते हैं, किस स्टॉक में पैसे लगाएं, फलां आईपीओ ठीक है या नहीं। मुमकिन है कि उनमें कई को मार्केट के बारे में कुछ भी नहीं पता हो, लेकिन ये लोग निवेश के लिए म्युचुअल फंड (Mutual Fund) का रास्ता पसंद नहीं करते। उन्हें लगता है कि फंड मैनेज करने वाले बीच में पैसे खा जाते होंगे। जो फंड में निवेश करते हैं, वे अक्सर फंड डिस्ट्रीब्यूटर या बैंक मैनेजर के चेहरे या उनकी बातों पर भरोसा करते हैं। सवाल है कि लोग क्यों हो फंड हाउस के पास सीधे पैसे जमा कराने से बचते हैं। भारत में शेयरों में सीधे ट्रेडिंग की सुविधा देने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक जीरोधा के सीईओ नितिन कामत ने कुछ समय पहले एक ट्वीट किया था। इसमें बताया गया था कि एक्टिव ट्रेडिंग करने वालों में सिर्फ एक फ़ीसदी ही तीन साल की अवधि में फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न हासिल कर पाते हैं।
शेयर बाजार में निवेशकों के जो आदर्श है वो भी आम लोगों के लिए म्युचुअल फंड के जरिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान की वकालत कर चुके हैं। लेकिन एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में बचत का करीब 10 फ़ीसदी हिस्सा ही म्युचुअल फंडों के पास जाता है। पिछले कुछ समय के दौरान 'म्युचुअल फंड सही है' कैंपेन चला कर लोगों को भागीदारी बढ़ाने की कोशिश हुई लेकिन अक्सर थाली में छेद निकल आया।
फंड स्कीमों के पुराने जानकार पी बी सुब्रमण्यम का कहना है कि बड़ी कंपनियों के शेयरों में फ्रंट रनिंग बेहद मुश्किल है लेकिन छोटी कंपनियों के शेयरों में यह मुमकिन है। खासतौर पर जिनकी खरीद-फरोख्त का वॉल्यूम कम है।
हालांकि पिछले डेढ़ सालों से मार्केट का परफॉर्मेंस बहुत अच्छा रहा है, मार्केट जिस तेजी के साथ पिछले डेढ़ सालों में बढ़ा है इतनी तेजी 1991 से अभी तक नहीं आई कुछ म्युचुअल फंड ऐसे भी हैं जिन्होंने निवेशकों के धन को 1 साल से कम में ही दोगुना कर दिया आज लोग रियल स्टेट को सबसे अच्छा मानते हैं लेकिन फाइनेंस एक्सपर्ट का यह मानना है की कुछ म्युचुअल फंड रियल एस्टेट से कई गुना ज्यादा रिटर्न कम समय में ही दे सकते हैं। दुनिया भर के फाइनेंस एक्सपर्ट का आज ऐसा मानना है कि यदि आप स्टॉक में निवेश करते हो या ट्रेडिंग करते हो तो भी म्युचुअल फंड में कुछ निवेश अवश्य करें क्योंकि म्युचुअल फंड में एक सिस्टम प्रदान करता है जहां सिस्टम होता है वहां पर फाइनेंस का संतुलन जरूर होता है म्युचुअल फंड में हमें कंपाउंडिंग ग्रोथ मिलती है इसलिए यदि हम अपने निवेश को धैर्य पूर्वक समय दें तो हमारा निवेश निश्चय ही कमाल करेगा। निवेश करने में आप अपने वित्तीय सलाहकार से विचार विमर्श जरूर करें, प्रयास करें कि आप डायरेक्ट निवेश न करें जब तक आपको पूरी जानकारी ना हो।
कुछ लोग सिर्फ रिटर्न देख कर ही प्लान को अच्छा मान लेते हैं और उसमे डायरेक्ट निवेश कर देते हैं उनमें से ज्यादातर लोगों को लंबे समय में उतना फायदा नहीं मिल पाता है, क्योंकि इसमें अल्फा, बीटा, ट्रेनोर रेशो, स्टैंडर्ड डेविएशन और पीई फॉर्मूला नहीं पता होता जिससे वह बाद में नुकसान भी उठाते हैं।

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