पैसा सबसे बड़ा भगवान? आज की सच्चाई
पहले आदमी ने भगवान का आविष्कार किया । उसको मानने वाले लोग आस्तिक कहलाए । यह लोग सब कुछ भगवान से ही मांगते थे ।
लेकिन कुछ लोगों (नास्तिक) ने उस भगवान को मानने से इनकार कर दिया , तो उनके लिए पैसे का आविष्कार किया गया , जो पैसे को भगवान मानने को तैयार हो गए ।
जैसे जैसे दुनियां में नास्तिकों की संख्या बढ़ने लगी , पैसा भगवान होता गया । यह भगवान ही अब हर जगह डिमांड में है । इस भगवान के अस्तित्व पर किसी को कोई संदेह नहीं है । यह साकार और निराकार दोनों रूप में मौजूद है ।
यह भगवान आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने में समर्थ हैं पर इनको अपने पास लाने के लिए अनेक तरह की तपस्या करनी पड़ती है जिसमें बुद्धिबल, बाहुबल , चतुराई , चालाकी , ठगी आदि 64 विद्याओं की जरूरत पड़ती है ।
कलयुग में टका (पैसा) भगवान की स्तुति इस प्रकार है
टका धर्मष्टका कर्म: ,टका हि परमं पदम।
यस्य गृहे टका नास्ति , हा! टकां टकटकायते ॥१॥
आना अंशकलाः प्रोक्ता रुप्योऽसौ भगवान स्वयम्।
अतस्तं सर्व इच्छंति रुप्यम हि गुणवत्तमम॥२।।
इसका अभिप्राय यह है की टका धर्म है, टका कर्म है और टका ही परमपद है. जिसके घर में टका नहीं है वह हाय टका ! हाय टका ! सोचता हुआ टके की ओर टकटकी लगाये रहता है.
सोलह आने के टके का प्रत्येक आना मानो एक कला है और इस प्रकार सोलह कला पूर्ण यह रूपया साक्षात् सोलह कला पूर्ण भगवन हैं. इसीलिए हे गुणवान रूपराम ! सभी जन तुम्हारी ही इच्छा करते हैं।
पैसा है, तो सभी पूछते हैं कैसा है।
पैसे का प्रताप-
पैसा है तो सब नक्शा नवींन है
पैसा नही हाथ तो धेले के दिन हैं
सब पूछेंगे आप कैसे हैं
जब तक आपकी जेब में पैसे हैं ।
पैसा अब दुनिया में छठी इन्द्री बन चुकी है। जिसके पास पैसा है उसकी पांचों इन्द्रिय काम करने लगती है और जिस पर नहीं है उसकी सभी इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं।
यह भी पूरी तरह सच्चाई है…
टका कर्मा, टका धर्मा
टका से ही टकाटक है।
टका नही है पास तो
सुबह से ही खटाखट है।
टका से ही सब ऐशो-आराम
टके से ही सब चकाचक है।
टके से ही नाम प्रसिद्धि
काम होते फटाफट है।
पैसा ही एक ऐसी शक्ति है कि- जिस पर नहीं है उसकी कोई इज्जत नहीं और जिस पर है वह किसी की इज्जत करता नहीं।
धन आने लोगों के मन बदलने लगते हैं।
डॉलर के सामने रुपया कितना ही गिर जाए, लेकिन इंसान से ज्यादा नहीं गिरेगा
हम तो इतना ही कहेंगे कि इतना मत इतरा… ये इंसान महादेव ने न जाने कितने बना-बनाकर मिट्टी में मिला दिए।
अब तो हालात यह है कि —
होने लगा है हिसाब, नफा और नुकसान का।
मासूम सी मोहब्बत अब तिजारत हो गई।
मान-सम्मान-स्वाभिमान बचाने के लिए पैसा जरूर कमाओ। दम से कमाओ फिर भले ही दान कर दो। यह पक्का है कि लक्ष्य को साधने वाले साधक लक्ष्मी पा ही लेते हैं।
लखपति बनने के लिए लाख प्रयास करें।
लखपति बनने के बाद आपको करोड़पति की श्रेणी में आने हेतु करोड़ का सन्धिविच्छेद करें कर+ होड़= करोड़ अर्थात आपको प्रतिस्पर्धा यानि कॉम्पटीशन करना पड़ेगा।
यहां तक भी धन से मन नहीं भरे, तो अरबपति बनने के लिए आ+रब, आ+रब करते रहिए अर्थात हर हर हर महादेव या नमः शिवाय च शिवाय नमः अथवा ॐ नमःशिवाय का सदैव जप करते रहें।
यदि कभी भोलेनाथ की कृपा से अरबपति बन जाएं, तो फिर खरबपति बनने में कमी न छोड़े।
खरब आया अर्थ है… खा+रब खा+रब मतलब सीधा सा है कि खरबपति होने के बाद इतना दान पुण्य, दया दिखाएं की दुनिया आपको याद रखे।
अभी इसके आगे शँखपति, नील पति, विष्णु पति, स्वर्णपति की व्याख्या वेल्थी भारत आगे किसी और लेख में करेगा।
पैसा कमाने के बाद कि आप अनुभवी बनेंगे।
धैर्य, जिद्द और जोखिम से धन इक्ट्ठा किया जा सकता है। पैसा पास होने सांस भी नहीं अटकती न कोई संक्रमण होता है ना ही कोरोना।
फिर फलसफा होगा कि-
जीवन के फलसफे का मुझे बोध है,
इसलिए जिंदगी मेरे लिए बोझ नहीं है…
बल्कि हर कदम पर एक शोध है।
आखिर सच्चाई तो यही है कि
कड़की होने पर इंसान…. लड़की की तरफ नहीं, करेंसी की तरफ भागता है।
आज के भौतिक हालात से तो यही सिद्ध होता है की सबसे बड़ा भगवान पैसा ही है ।

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