म्युचुअल फंड निवेश में ना करें ऐसी गलतियां..
वित्तीय उद्देश्यों को पूरा करने और बड़ी बचत करने के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश (Mutual Fund Investment ) करना भी बेहतर विकल्प साबित होता है. देश में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है. बाजार के उतार-चढ़ाव पर ध्यान देना, बचत के महत्व को समझने के कारण लोग अच्छा ख़ासा मुनाफ़ा भी कमा रहे हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसी गलतियां कर जाते हैं कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने का उनका अनुभव खराब (Major Mistakes) हो जाता है.
योजनाओं को बिना समझे निवेश करना
कई लोग बस निवेश करने के उद्देश्य से बिना सोचे समझे म्यूचुअल फंड में निवेश की शुरुआत कर देते हैं. कई बार ये दूसरों की देखा-देखी के कारण भी हो सकता है. निवेश करने से पहले आपको योजनाओं को समझना होगा. बिना स्कीम की जानकारी लिए यदि निवेश करते हैं तो उसमें मुनाफे की उम्मीद कम हो जाती है.
जैसे इक्विटी म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म में निवेश करके बेहतर रिटर्न कमाया जा सकता है. लेकिन कई निवेशक शॉर्ट टर्म में इसका चुनाव करते हैं. जिसके कारण उन्हें मनचाहा रिटर्न नहीं मिल पाता. इक्विटी म्यूचुअल फंड में जितने ज्यादा समय के लिए निवेश करते हैं उतना ज्यादा रिटर्न मिल सकता है, हालांकि इसके लिए अपने म्युचुअल फंड सलाहकार से जरूर सलाह लें।
बिना किसी वित्तीय लक्ष्य के निवेश करना
जब भी निवेश की शुरुआत करें तो सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित कर लें. बिना किसी फाइनेंशियल गोल इन्वेस्टमेंट बड़ी गलती साबित हो सकती है. आप छोटे-छोटे गोल बनाकर निवेश कर सकते हैं. ताकि आपको अपनी ग्रोथ के बारे में भी सही जानकारी मिलती रहे और प्रोग्रेस को भी ट्रैक कर सके.
बाजार में गिरावट होने पर घबराना
कई निवेशक ऐसे होते हैं जो बाजार में रौनक होने पर निवेश करते हैं और गिरावट होने पर घबराकर फंड निकाल लेते हैं. या फिर आगे निवेश रोक देते हैं. जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है. लेकिन गिरावट के दौर में प्रति यूनिट कास्ट कम हो जाती है.
कई लोग अपने मन के अनुसार रेंडम इन्वेस्टमेंट करते हैं. लेकिन उन्हें यह ध्यान देना चाहिए अच्छे रिटर्न के लिए सही अकाउंट में निवेश करना भी जरूरी है. यदि आप चाहते हैं कि 20 साल में निवेश के जरिये एक करोड़ रुपये जमा हो जाए तो उसके लिए आपको हर महीने लगभग 5 से 6 हजार रुपये की एसआईपी करनी होगी. तभी लक्ष्य हासिल हो पाएगा।
अमूमन इंडेक्स और इक्विटी फंड में 16 से 20 प्रतिशत का कंपाउंडिंग इंटरेस्ट मिलता है जो कि लंबी अवधि में एक शानदार वैल्यू बनता है यदि इसे पेंशन के रूप में लिया जाए तो कई पीढियों तक इसका उपयोग किया जा सकता है। अमेरिका इसका बहुत बड़ा उदाहरण है वहां पर सबसे पहले निवेश किया गया था उनकी पांचवी से छठी पीढ़ी आज अपने पूर्वजों के निवेश किए हुए पैसों का उपभोग कर रही है।
जब तक बहुत आवश्यक ना हो पैसे ना निकालें
कई निवेशक ऐसे होते हैं जो जरूरत पड़ने पर निवेश से रिडम्प्शन करने लग जाते हैं. यानी फंड्स से पैसे बार-बार निकालते हैं, ऐसे में उन्हें कम्पाउंडिंग रिटर्न का पूरा लाभ नही मिलता. जिसके कारण भी लाभ पर असर होता है.

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